दिल्ली के पास घूमने की 20 सबसे अच्छी जगहें 2026 | Best Places Near Delhi
दिल्ली में रहते हुए घूमने के लिए हमेशा लंबी छुट्टी की जरूरत नहीं पड़ती। कई बार बस एक वीकेंड मिलता है और मन करता है कि रोज की भागदौड़, ट्रैफिक और शोर से थोड़ी देर के लिए दूर निकल जाएँ। अच्छी बात यह है कि दिल्ली से कुछ ही घंटों की दूरी पर ऐसी कई जगहें हैं जहाँ परिवार, दोस्तों या साथी के साथ एक छोटा सा ट्रिप आसानी से Plan किया जा सकता है। कहीं पहाड़ों की ठंडी हवा चेहरे पर लगते ही थकान कम महसूस होने लगती है, तो कहीं पुराने किले, मंदिर और जंगल आपको रोजमर्रा की जिंदगी से बिल्कुल अलग माहौल में ले जाते हैं।
जगह चुनते समय मैं हमेशा यही देखता हूँ कि उस समय मन किस तरह की जगह चाहता है। अगर पुराने किले, महल और इतिहास में दिलचस्पी है, तो Agra और Jaipur का सफर अच्छा रहेगा। अगर गंगा किनारे कुछ सुकून के पल बिताने के साथ थोड़ा एडवेंचर भी चाहिए, तो Rishikesh और Haridwar की तरफ निकल सकते हैं। वहीं, गर्मियों में शहर की गर्मी से राहत चाहिए और पहाड़ों में सुबह की ठंडी हवा महसूस करने का मन हो, तो Mussoorie, Lansdowne और Kasauli जैसे हिल स्टेशन काफी अच्छे लगते हैं।
अगर आप दिल्ली से बहुत दूर जाए बिना शहर में ही कुछ अच्छा Explore करना चाहते हैं, तो दिल्ली में घूमने की सबसे अच्छी जगहें भी देख सकते हैं।
सच कहें तो हर ट्रिप का मतलब किसी बड़ी जगह को कवर करना नहीं होता। कई बार रास्ते में किसी छोटे से ढाबे पर चाय पीना, पहाड़ों के बीच कुछ देर खामोशी से बैठना या परिवार के साथ बिना किसी जल्दबाजी के घूमना ही ट्रिप की सबसे अच्छी याद बन जाता है। इसलिए अगर इस वीकेंड कहीं निकलने का मन है, तो दिल्ली के आसपास की इन जगहों में से अपनी पसंद की जगह चुनिए और कुछ समय के लिए रोज की जिंदगी को पीछे छोड़ दीजिए।
1. आगरा – Agra
उत्तर प्रदेश का आगरा शहर अपने ऐतिहासिक महत्व और खूबसूरत मुगलकालीन इमारतों के लिए जाना जाता है। यहाँ स्थित ताजमहल इसकी सबसे बड़ी पहचान है, जिसे देखने के लिए हर साल बड़ी संख्या में लोग आगरा आते हैं। ताजमहल के अलावा आप यहाँ आगरा किला, मेहताब बाग और फतेहपुर सीकरी जैसी जगहों को भी घूम सकते हैं। यमुना नदी के किनारे बसा आगरा इतिहास और वास्तुकला पसंद करने वालों के लिए खास जगह है। दिल्ली से आगरा की दूरी भी ज्यादा नहीं है, इसलिए अगर आप वीकेंड पर एक छोटी ट्रिप का प्लान बना रहे हैं, तो आगरा एक अच्छा विकल्प हो सकता है।
आगरा घूमने से पहले जरूरी जानकारी
आगरा घूमने का प्लान बना रहे हैं तो जाने से पहले दूरी, Travel Time और बजट का थोड़ा अंदाजा होना अच्छा रहता है। इससे ट्रिप को लेकर Planning आसान हो जाती है।
- दिल्ली से दूरी: दिल्ली से आगरा की दूरी करीब 230–250 किमी है। सड़क से जाने पर traffic और route के हिसाब से समय थोड़ा कम-ज्यादा हो सकता है।
- कैसे जाएँ: दिल्ली से आगरा जाने के लिए ट्रेन, बस और कार तीनों अच्छे options हैं। अगर जल्दी पहुँचना है तो ट्रेन आरामदायक रहती है। वहीं अपनी कार से जाने पर आप रास्ते में अपनी सुविधा के हिसाब से रुक भी सकते हैं।
- कितना समय रखें: सिर्फ ताजमहल, आगरा किला और आसपास की कुछ जगहें देखनी हैं तो 1 दिन भी काफी है। लेकिन बिना जल्दबाजी घूमना चाहते हैं और फतेहपुर सीकरी भी देखना है, तो 2 दिन का plan ज्यादा सही रहेगा।
- घूमने की प्रमुख जगहें: आगरा में सबसे पहले ताजमहल देखने का मन करता है। इसके साथ आगरा किला, मेहताब बाग, इत्माद-उद-दौला का मकबरा, सिकंदरा और फतेहपुर सीकरी को भी अपनी list में शामिल कर सकते हैं।
- अनुमानित बजट: अगर दिल्ली से एक दिन के लिए जा रहे हैं, तो travel, खाना और आसपास घूमने को मिलाकर करीब ₹1,500–₹3,000 प्रति व्यक्ति का बजट रखा जा सकता है। एक रात रुकने पर खर्च बढ़ जाएगा और 2 दिन की ट्रिप के लिए करीब ₹3,500–₹6,000 या उससे ज्यादा लग सकते हैं। होटल और सफर का विकल्प बदलने पर बजट भी बदल जाएगा।
- किस season में जाएँ: आगरा घूमने के लिए अक्टूबर से मार्च का मौसम सबसे अच्छा रहता है। इस दौरान मौसम आमतौर पर sightseeing के लिए आरामदायक रहता है। गर्मियों में दोपहर काफी गर्म हो सकती है, इसलिए गर्मी के दिनों में सुबह जल्दी घूमना बेहतर रहेगा।
एक जरूरी बात: अगर ताजमहल आपकी सफर का मुख्य आकर्षण है, तो दिन चुनते समय ध्यान रखें कि शुक्रवार को ताजमहल बंद रहता है। इसलिए अपनी यात्रा की प्लानिंग उसी हिसाब से करें।
अगर आगरा घूमने का मन बना रहे हैं, तो जाने से पहले आगरा में घूमने की प्रमुख जगहें और वहाँ के Famous Tourist Spots की जानकारी जरूर देख लें।
2. ऋषिकेश – Rishikesh
उत्तराखंड में गंगा नदी के किनारे बसा ऋषिकेश ऐसी जगह है, जहाँ पहुँचते ही शहर की भागदौड़ से थोड़ी राहत महसूस होने लगती है। गंगा के किनारे बैठकर बहते पानी को देखना और पहाड़ों के शांत माहौल में कुछ समय बिताना अपने आप में एक अलग अनुभव है। यहाँ आप घाटों पर घूमने के साथ योग और ध्यान कर सकते हैं, वहीं अगर थोड़ा एडवेंचर पसंद है तो रिवर राफ्टिंग का मज़ा भी ले सकते हैं। दिल्ली से वीकेंड पर घूमने के लिए ऋषिकेश इसलिए भी अच्छा है क्योंकि कम समय में प्रकृति, शांति और एडवेंचर तीनों का आनंद मिल जाता है।
ऋषिकेश ट्रिप की जरूरी जानकारी
- दिल्ली से दूरी: दिल्ली से ऋषिकेश की दूरी करीब 250 किमी है। अपनी कार से जाएँ तो आमतौर पर 5–7 घंटे लग सकते हैं। हालांकि weekend पर ट्रैफिक ज्यादा मिलने से सफर थोड़ा लंबा हो सकता है।
- कैसे जाएँ: ऋषिकेश जाने के लिए कार, बस या ट्रेन तीनों अच्छे विकल्प हैं। अगर आप आराम से रोड ट्रिप का मजा लेना चाहते हैं तो कार बेहतर रहेगी। ट्रेन से जाने पर हरिद्वार तक पहुँचकर वहाँ से बस या टैक्सी लेकर ऋषिकेश जा सकते हैं।
- कितना समय रखें: पहली बार जा रहे हैं तो 2 दिन और 1 रात का Plan ठीक रहेगा। इसमें आप शहर की प्रमुख जगहें देख सकते हैं, गंगा आरती कर सकते हैं और थोड़ा समय नदी किनारे आराम से भी बिता सकते हैं। अगर Rafting, Trekking या आसपास की जगहें भी घूमनी हैं, तो 3 दिन रखना ज्यादा अच्छा रहेगा। अगर आप Adventure के साथ थोड़ा सुकून भी चाहते हैं, तो ऋषिकेश में घूमने की खूबसूरत जगहें जरूर देखें।
- घूमने की प्रमुख जगहें: ऋषिकेश में त्रिवेणी घाट, राम झूला, लक्ष्मण झूला क्षेत्र, बीटल्स आश्रम, परमार्थ निकेतन और शिवपुरी जैसी जगहें देख सकते हैं। शाम के समय गंगा आरती में बैठना trip का सबसे यादगार हिस्सा हो सकता है।
- किस season में जाएँ: ऋषिकेश घूमने के लिए मार्च से मई और सितंबर से दिसंबर का मौसम काफी अच्छा रहता है। मौसम सुहावना होने की वजह से sightseeing और outdoor activities का मजा भी ज्यादा आता है। अगर आपका मुख्य मकसद River Rafting है, तो जाने से पहले उस समय Activity चालू है या नहीं, यह जरूर Check कर लें।
3. जयपुर – Jaipur
जयपुर घूमने का अनुभव थोड़ा अलग ही होता है। शहर में कदम रखते ही गुलाबी रंग की इमारतें, पुराने किले और बाजारों की चहल-पहल आपको राजस्थान की संस्कृति से जोड़ देती है। हवा महल के सामने खड़े होकर उसकी खूबसूरत नक्काशी देखना और फिर आमेर किले की गलियों में घूमना अपने आप में यादगार अनुभव है। शाम के समय जल महल का नज़ारा और जयपुर के बाजारों में घूमते हुए राजस्थानी सामान देखना भी काफी अच्छा लगता है। अगर आपको इतिहास और संस्कृति के साथ-साथ स्वादिष्ट राजस्थानी खाना पसंद है, तो जयपुर आपको जरूर पसंद आएगा। सर्दियों में यहाँ घूमने का मजा और बढ़ जाता है, क्योंकि मौसम सुहावना रहता है और पूरे दिन आराम से शहर की अलग-अलग जगहों को explore किया जा सकता है।
जयपुर ट्रिप की जरूरी जानकारी
अगर आप दिल्ली से जयपुर घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो यह एक ऐसा trip है जिसे weekend में भी आसानी से किया जा सकता है। दिल्ली से जयपुर की दूरी करीब 280–300 किमी है और सड़क से जाने में ट्रैफिक के हिसाब से लगभग 5–6 घंटे लग सकते हैं। रास्ते में हाईवे का सफर भी अच्छा लगता है, इसलिए दोस्तों या परिवार के साथ रोड ट्रिप का अपना अलग मजा है। ट्रेन और बस भी जयपुर जाने के लिए सुविधाजनक विकल्प हैं।
जयपुर को आराम से घूमने के लिए कम से कम 2 दिन जरूर रखें। इतने समय में आप आमेर किला, हवा महल, सिटी पैलेस, जंतर-मंतर, जल महल और नाहरगढ़ किले जैसी प्रमुख जगहों को देख सकते हैं। अगर आपको शहर को बिना जल्दबाजी के महसूस करना है और बाजारों में घूमने या राजस्थानी खाना enjoy करने का भी मन है, तो 3 दिन रखना ज्यादा बेहतर रहेगा।
बजट की बात करें तो एक सामान्य 2 दिन की जयपुर trip करीब ₹2,500–₹5,000 प्रति व्यक्ति में की जा सकती है। हालांकि होटल, आने-जाने के साधन और खाने-पीने की पसंद के अनुसार खर्च कम या ज्यादा हो सकता है।
जयपुर घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च के बीच माना जाता है। खासकर नवंबर से फरवरी तक मौसम सुहावना रहता है, इसलिए दिनभर किले और बाजार घूमने में गर्मी ज्यादा परेशान नहीं करती। सर्दियों में जयपुर की सुबह और शाम का माहौल खास तौर पर अच्छा लगता है।
अगर आप दिल्ली से एक शानदार Historical Trip Plan कर रहे हैं, तो जयपुर में घूमने की प्रमुख जगहें भी देखना न भूलें।
4. मसूरी – Mussoorie
मसूरी उत्तराखंड का एक खूबसूरत और लोकप्रिय हिल स्टेशन है, जिसे “पहाड़ों की रानी” भी कहा जाता है। पहाड़ों के बीच बसा यह शहर अपने सुहावने मौसम, हरी-भरी वादियों और शांत माहौल के लिए जाना जाता है। यहाँ परिवार, दोस्तों या पार्टनर के साथ कुछ दिन आराम से बिताए जा सकते हैं। मसूरी में मॉल रोड, कंपनी गार्डन, गन हिल और केम्प्टी फॉल्स जैसी कई जगहें हैं, जहाँ घूमने के साथ-साथ पहाड़ों की खूबसूरती का आनंद भी लिया जा सकता है। गर्मियों में जब मैदानी इलाकों में काफी गर्मी होती है, तब मसूरी का ठंडा और खुशनुमा मौसम इसे एक शानदार कम समय में घूमने की जगह बना देता है।
मसूरी घूमने की पूरी जानकारी
दिल्ली से दूरी: मसूरी दिल्ली से लगभग 280–290 किलोमीटर दूर है। अगर आप सड़क से जा रहे हैं, तो आमतौर पर 6–7 घंटे का समय लग सकता है। हालांकि, रास्ते में ट्रैफिक और मौसम की स्थिति के हिसाब से यह समय थोड़ा कम या ज्यादा हो सकता है।
कैसे जाएँ: दिल्ली से मसूरी जाने के लिए car या cab सबसे आसान विकल्प है। अगर ट्रेन से जाना चाहते हैं, तो पहले देहरादून तक ट्रेन ले सकते हैं और वहाँ से taxi या bus से मसूरी पहुँच सकते हैं। देहरादून से मसूरी की दूरी करीब 30–35 किलोमीटर है। दिल्ली से बस के जरिए भी मसूरी या देहरादून पहुँचना आसान है।
कितना समय रखें: मसूरी घूमने के लिए 2 से 3 दिन का समय काफी रहेगा। इतने समय में आप शहर की ज्यादातर लोकप्रिय जगहें देख सकते हैं और थोड़ा समय आसपास की खूबसूरत वादियों में घूमने के लिए भी निकाल सकते हैं।
घूमने की प्रमुख जगहें: मसूरी में घूमने के लिए मॉल रोड, केम्प्टी फॉल्स, गन हिल, कंपनी गार्डन, लाल टिब्बा, कैमल्स बैक रोड और लैंडौर जैसी जगहों को अपनी list में जरूर रखें। अगर आपको शांत जगहों पर घूमना पसंद है, तो लैंडौर और लाल टिब्बा का माहौल आपको खासा पसंद आएगा।
किस season में जाएँ: मसूरी घूमने के लिए मार्च से जून का समय काफी अच्छा माना जाता है। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और घूमने में ज्यादा परेशानी नहीं होती। अगर आप कम भीड़ में मसूरी देखना चाहते हैं, तो सितंबर से नवंबर के बीच भी जा सकते हैं। वहीं दिसंबर से फरवरी तक यहाँ ठंड काफी बढ़ जाती है और बर्फबारी देखने का मौका भी मिल सकता है। मानसून में बारिश के कारण पहाड़ी रास्तों पर सफर थोड़ा मुश्किल हो सकता है।
पहाड़ों की ठंडी हवा और खूबसूरत नजारों के लिए मसूरी हमेशा से लोकप्रिय है। अगर आप यहाँ जाने की सोच रहे हैं, तो मसूरी घूमने की पूरी जानकारी आपके काम आएगी।
5. हरिद्वार – Haridwar
हरिद्वार का नाम आते ही मन में गंगा नदी, मंदिरों की घंटियाँ और हर की पौड़ी की शाम की आरती का दृश्य आने लगता है। जब हम पहली बार हरिद्वार पहुँचे, तो शहर का माहौल बाकी Tourist Places से काफी अलग लगा। यहाँ घूमने के साथ-साथ एक धार्मिक और शांत माहौल भी महसूस होता है।
सुबह के समय हम हर की पौड़ी पहुँचे। घाट पर श्रद्धालुओं की अच्छी-खासी भीड़ थी और लोग गंगा में स्नान कर रहे थे। कुछ देर घाट के किनारे बैठकर बहती हुई गंगा को देखना अपने आप में काफी अच्छा अनुभव था। आसपास मंदिरों की घंटियों और मंत्रों की आवाज के बीच गंगा का शांत बहाव मन को सुकून देता है।गंगा किनारे सुकून भरा समय बिताने के लिए हरिद्वार जा रहे हैं, तो हरिद्वार घूमने की पूरी जानकारी पहले देख लेना अच्छा रहेगा।
अगर आप पहली बार हरिद्वार जा रहे हैं, तो मेरी सलाह रहेगी कि शाम की गंगा आरती को अपनी यात्रा में जरूर शामिल करें। हरिद्वार में सिर्फ हर की पौड़ी ही देखने लायक नहीं है। समय मिले तो मनसा देवी मंदिर, चंडी देवी मंदिर, कनखल और दक्ष महादेव मंदिर भी घूम सकते हैं। इन जगहों पर जाने से हरिद्वार के धार्मिक और सांस्कृतिक माहौल को और करीब से समझने का मौका मिलता है।
हरिद्वार में घूमने की प्रमुख जगहें
हरिद्वार घूमते समय हमें सबसे ज्यादा अच्छा गंगा किनारे का माहौल लगा। लेकिन अगर आपके पास एक-दो दिन का समय है, तो हर की पौड़ी के अलावा आसपास की कुछ प्रसिद्ध जगहों को भी अपनी यात्रा में शामिल किया जा सकता है।
- हर की पौड़ी – हरिद्वार आए हैं तो सबसे पहले यहाँ जाना बनता है। सुबह घाट पर बैठकर गंगा को देखना और शाम को गंगा आरती में शामिल होना हमारी यात्रा का सबसे यादगार हिस्सा रहा।
- मनसा देवी मंदिर – मंदिर तक जाने के लिए पैदल रास्ते के साथ रोपवे का विकल्प भी मिलता है। अगर भीड़ कम हो तो रोपवे से ऊपर जाने का अनुभव काफी अच्छा रहता है और रास्ते में हरिद्वार शहर का नजारा भी दिखाई देता है।
- चंडी देवी मंदिर – नील पर्वत पर स्थित यह मंदिर धार्मिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। यहाँ पहुँचने के बाद ऊपर से आसपास का नजारा देखने का मौका भी मिलता है।
- भारत माता मंदिर – यह मंदिर अपने अलग तरह के स्वरूप के कारण दूसरे मंदिरों से थोड़ा अलग लगता है। अगर आप पहली बार हरिद्वार आए हैं तो इसे देखने के लिए कुछ समय निकाल सकते हैं।
- दक्ष महादेव मंदिर – कनखल में स्थित यह प्राचीन शिव मंदिर शांत माहौल में दर्शन करने के लिए अच्छा स्थान है। यहाँ घूमते समय हरिद्वार के धार्मिक इतिहास से भी जुड़ने का एहसास होता है।
- सप्तऋषि आश्रम – अगर आप भीड़ से थोड़ी दूरी बनाकर शांत जगह पर समय बिताना चाहते हैं, तो यह जगह आपको पसंद आ सकती है। यहाँ का वातावरण बाकी व्यस्त हिस्सों की तुलना में काफी शांत महसूस होता है।
- शांतिकुंज – हरिद्वार की यात्रा में अगर आपके पास थोड़ा अतिरिक्त समय है, तो शांतिकुंज भी देखा जा सकता है। यहाँ का वातावरण शांत और अनुशासित है, इसलिए कुछ समय आराम से बिताने का अच्छा मौका मिलता है।
हरिद्वार जाने का सही समय
हमारे अनुभव में हरिद्वार घूमने के लिए अक्टूबर से मार्च का समय काफी आरामदायक रहता है। मौसम बहुत ज्यादा गर्म नहीं होता और दिन में घूमने में भी परेशानी कम होती है। खासकर अगर आप परिवार के साथ यात्रा कर रहे हैं, तो ठंड के महीनों में घूमना ज्यादा अच्छा लग सकता है।
दिल्ली से हरिद्वार कैसे जाएँ
दिल्ली से हरिद्वार की दूरी लगभग 210–230 किलोमीटर है। हम सड़क से जाएँ तो सामान्य ट्रैफिक में करीब 5–6 घंटे का समय मानकर चलना बेहतर रहता है, हालांकि वीकेंड और त्योहारों के दौरान समय बढ़ सकता है।
6. नैनीताल – Nainital
नैनीताल पहुँचते ही सबसे पहले नजर नैनी झील और चारों तरफ फैली हरी-भरी पहाड़ियों पर जाती है। हमें झील के किनारे घूमना और शाम के समय Mall Road की चहल-पहल देखना काफी अच्छा लगा। नैनी झील में नाव की सवारी करने का अपना ही मजा है, खासकर जब चारों तरफ पहाड़ और सामने पूरा शहर दिखाई देता है। समय मिले तो नैना देवी मंदिर, Snow View Point और Tiffin Top भी घूम सकते हैं। अगर आप पहली बार नैनीताल जा रहे हैं, तो एक रात रुकना बेहतर रहेगा। सुबह का ठंडा मौसम, शांत पहाड़ और झील का खूबसूरत नजारा इस छोटी-सी यात्रा को और यादगार बना देते हैं।
दिल्ली से नैनीताल की दूरी
दिल्ली से नैनीताल की दूरी करीब 300–310 किलोमीटर है। हम सड़क से गए थे और सामान्य ट्रैफिक में लगभग 7–9 घंटे का समय लगा। पहाड़ी रास्ता शुरू होने के बाद सफर थोड़ा धीमा हो जाता है, इसलिए सुबह जल्दी निकलना बेहतर रहता है। वीकेंड या छुट्टी के दिनों में ट्रैफिक ज्यादा मिल सकता है, इसलिए थोड़ा Extra Time लेकर चलें। झीलों और पहाड़ों के बीच घूमने का मन है, तो नैनीताल में घूमने की प्रमुख जगहें आपके Trip की Planning में मदद करेंगी।
नैनीताल कैसे जाएँ
दिल्ली से नैनीताल के लिए कार या cab से जाना हमें ज्यादा आसान लगा, खासकर अगर परिवार के साथ जा रहे हों। रास्ते में अपनी सुविधा के अनुसार रुक सकते हैं और पहाड़ी सफर का मजा भी ले सकते हैं। ट्रेन से जाने का plan हो तो Kathgodam तक ट्रेन लेना एक अच्छा विकल्प है। वहाँ से नैनीताल करीब 35 किलोमीटर दूर है और आगे taxi या cab आसानी से मिल जाती है। Budget में जाना हो तो दिल्ली से bus भी ले सकते हैं।
नैनीताल में घूमने की प्रमुख जगहें
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नैनी झील – Boating और lakeside walk के लिए।
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Mall Road – शाम की चहल-पहल और shopping के लिए।
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नैना देवी मंदिर – झील के किनारे स्थित प्रसिद्ध मंदिर।
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Snow Viewpoint – पहाड़ों के खूबसूरत views के लिए।
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Tiffin Top – Nature और पहाड़ी views पसंद करने वालों के लिए।
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Naina Peak – Trekking और panoramic views के लिए।
नैनीताल किस Season में जाएँ
नैनीताल घूमने के लिए मार्च से जून और सितंबर से नवंबर का समय हमें सबसे अच्छा लगा। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और पहाड़ों की खूबसूरती भी अच्छी तरह देखने को मिलती है। अगर snowfall देखना चाहते हैं, तो दिसंबर से फरवरी के बीच जा सकते हैं। जुलाई से सितंबर तक बारिश के कारण पहाड़ी रास्तों पर सफर थोड़ा मुश्किल हो सकता है।
7. जिम कॉर्बेट – Jim Corbett
जिम कॉर्बेट में हमें सबसे ज्यादा मजा सुबह की जीप सफारी में आया। सुबह जल्दी जंगल के अंदर जाते समय चारों तरफ पेड़ों के बीच पक्षियों की आवाज और शांत माहौल काफी अलग महसूस होता है। रास्ते में हमें हिरण और कई तरह के पक्षी देखने को मिले, जबकि बाघ देखने के लिए थोड़ा किस्मत का साथ भी चाहिए। सफारी के दौरान हर मोड़ पर यही उम्मीद रहती है कि शायद अगली झाड़ी के पीछे कोई जंगली जानवर दिखाई दे जाए। सफारी खत्म होने के बाद भी जंगल का वह शांत माहौल काफी देर तक याद रहता है। अगर आप वन्यजीवों को करीब से महसूस करना चाहते हैं, तो जिम कॉर्बेट का अनुभव जरूर लेना चाहिए।
दिल्ली से जिम कॉर्बेट की दूरी
दिल्ली से जिम कॉर्बेट की दूरी करीब 250–280 किलोमीटर है। सड़क से आमतौर पर 6–7 घंटे लग जाते हैं। सुबह जल्दी निकलें तो सफर थोड़ा आरामदायक रहता है।
जिम कॉर्बेट कैसे जाएँ
हमारे हिसाब से कार या कैब सबसे आसान विकल्प है। ट्रेन से जाना हो तो रामनगर तक ट्रेन ले सकते हैं, जहाँ से कॉर्बेट के अलग-अलग गेट तक टैक्सी मिल जाती है।
घूमने की प्रमुख जगहें
मुख्य आकर्षण जीप सफारी, ढिकाला, बिजरानी, झिरना और कॉर्बेट वॉटरफॉल हैं। इनमें सफारी का अनुभव सबसे खास रहता है।
किस Season में जाएँ
नवंबर से जून के बीच जाना अच्छा रहता है। वन्यजीव देखने के लिए सुबह की सफारी का अनुभव ज्यादा अच्छा रहता है। मानसून में कई जंगल क्षेत्र सफारी के लिए बंद भी रहते हैं। अगर आपको जंगल और Wildlife पसंद है, तो जिम कॉर्बेट घूमने की पूरी जानकारी आपके लिए काफी काम की हो सकती है।
8. लैंसडाउन – Lansdowne
लैंसडाउन पहुँचते ही ऐसा लगा जैसे कुछ समय के लिए शहर की भागदौड़ पीछे छूट गई हो। यहाँ की ठंडी हवा, देवदार के पेड़ और शांत पहाड़ी रास्ते मन को काफी सुकून देते हैं। हमने बिना किसी जल्दी के Bhulla Tal के आसपास घूमने और Tip-n-Top से पहाड़ों को देखने में समय बिताया। खासकर सुबह का माहौल बहुत अच्छा लगा चारों तरफ शांति और ठंडी हवा, बस मन करता है थोड़ी देर वहीं बैठे रहें। अगर आप ऐसी जगह ढूंढ रहे हैं जहाँ वीकेंड पर बस आराम करें और दिमाग को थोड़ा break दें, तो लैंसडाउन एक अच्छा अनुभव रहेगा।
दिल्ली से लैंसडाउन की दूरी
दिल्ली से लैंसडाउन करीब 250–270 किलोमीटर है। हम सड़क से गए थे और रास्ते में रुकते हुए लगभग 6–7 घंटे लगे। पहाड़ी रास्ता शुरू होने के बाद सफर भी काफी अच्छा लगता है।
लैंसडाउन कैसे जाएँ
हमारे लिए कार से जाना सबसे आरामदायक रहा। अगर ट्रेन से जाना चाहें तो Kotdwar तक ट्रेन लेकर वहाँ से टैक्सी कर सकते हैं।
लैंसडाउन किस Season में जाएँ और कितना समय रखें
मार्च से जून और सितंबर से नवंबर का मौसम हमें घूमने के लिए अच्छा लगा। अगर ठंड का मजा लेना है तो दिसंबर से फरवरी जा सकते हैं, लेकिन गर्म कपड़े जरूर रखें। लैंसडाउन के लिए 2 दिन और 1 रात काफी हैं। अगर बिना जल्दी किए घूमना और थोड़ा आराम करना है, तो 2 रातें रखना ज्यादा अच्छा रहेगा।
घूमने की प्रमुख जगहें
यहाँ Bhulla Tal, Tip-n-Top, St. Mary’s Church, War Memorial और Lansdowne Market घूम सकते हैं। इनमें Tip-n-Top से पहाड़ों का नजारा हमें सबसे ज्यादा पसंद आया। भीड़ से दूर शांत पहाड़ी माहौल पसंद है, तो लैंसडाउन में घूमने की खूबसूरत जगहें भी देख सकते हैं।
9. कासौली – Kasauli
कासौली में बिताया हमारा समय बाकी हिल स्टेशन से थोड़ा अलग रहा। यहाँ न कोई जल्दी थी और न ही बहुत ज्यादा भीड़-भाड़। Mall Road पर आराम से घूमते हुए cafés में बैठना और फिर Gilbert Trail की तरफ निकल जाना काफी अच्छा लगा। देवदार के पेड़ों के बीच ठंडी हवा में चलते हुए सच में मन हल्का-सा हो गया। शाम को पहाड़ों के पीछे ढलता सूरज देखा तो कुछ देर वहीं रुकने का मन किया। कासौली की खासियत शायद यही है कि यहाँ आपको बहुत सारी जगहें cover करने की चिंता नहीं रहती, बस आराम से घूमिए, बैठिए और पहाड़ों की शांति को महसूस कीजिए।
दिल्ली से कासौली की दूरी
दिल्ली से कासौली करीब 290–300 किलोमीटर दूर है। हम कार से गए थे और ट्रैफिक के हिसाब से लगभग 6–7 घंटे लगे। आखिरी हिस्से का पहाड़ी रास्ता सफर को और दिलचस्प बना देता है।
कासौली कैसे जाएँ
हमारे लिए कार से जाना सबसे आसान रहा। अगर ट्रेन से जाना हो तो Kalka तक ट्रेन लेकर आगे taxi या cab से कासौली जा सकते हैं।
घूमने की प्रमुख जगहें
हमने Mall Road, Gilbert Trail, Monkey Point, Christ Church और Sunset Point देखा। इनमें Sunset Point पर शाम का समय हमें सबसे ज्यादा अच्छा लगा।
कासौली किस समय में जाएँ
मार्च से जून और सितंबर से नवंबर का मौसम घूमने के लिए अच्छा रहता है। सर्दियों में ठंड काफी बढ़ जाती है, लेकिन अगर आपको ठंड और snowfall पसंद है तो दिसंबर–फरवरी का समय भी अच्छा अनुभव दे सकता है। शांत वातावरण और पहाड़ों में आराम से समय बिताना चाहते हैं, तो कसौली घूमने की पूरी जानकारी जरूर पढ़ें।
10. मथुरा-वृंदावन – Mathura-Vrindavan
मथुरा-वृंदावन की गलियों में कदम रखते ही “राधे-राधे” सुनाई देने लगता है और माहौल अपने आप भक्ति से भर जाता है। हमें यहाँ की सबसे अच्छी बात यही लगी कि हर तरफ कृष्ण की भक्ति और एक अलग-सी अपनापन महसूस होता है। बांके बिहारी मंदिर में दर्शन के दौरान भीड़ जरूर काफी मिली, लेकिन वहाँ का माहौल अपने आप में खास था। शाम को प्रेम मंदिर की रोशनी और यमुना किनारे कुछ देर बैठना यात्रा का सबसे सुकून भरा हिस्सा रहा। मथुरा-वृंदावन ऐसी जगह है जहाँ घूमने से ज्यादा अच्छा लगता है बस कुछ देर रुककर उस माहौल को महसूस करना।
दिल्ली से मथुरा-वृंदावन की दूरी
दिल्ली से मथुरा करीब 180 किलोमीटर है। हम सड़क से गए थे और traffic के हिसाब से लगभग 3 घंटे लगे। सुबह जल्दी निकलें तो सफर ज्यादा आरामदायक रहता है। अगर मथुरा के साथ वृंदावन भी घूमना चाहते हैं, तो वृंदावन में घूमने की प्रमुख जगहें आपके लिए उपयोगी रहेंगी।
कैसे जाएँ कितना समय रखें
हमारे लिए कार से जाना सबसे आसान रहा, खासकर परिवार के साथ। ट्रेन भी बढ़िया विकल्प है। मथुरा स्टेशन पहुँचने के बाद वृंदावन के लिए cab या auto आसानी से मिल जाता है। 2 दिन और 1 रात इस trip के लिए ठीक हैं। इससे मंदिरों में दर्शन करने और शाम को वृंदावन की गलियों व बाजारों में घूमने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है।
घूमने की प्रमुख जगहें - Best Places to Visit
बांके बिहारी मंदिर, प्रेम मंदिर, इस्कॉन मंदिर, श्रीकृष्ण जन्मभूमि, द्वारकाधीश मंदिर और यमुना घाट हमारी यात्रा में खास रहे। शाम का समय प्रेम मंदिर और यमुना किनारे बिताना हमें सबसे अच्छा लगा।
किस समय में जाएँ
मथुरा-वृंदावन घूमने के लिए हमें अक्टूबर से मार्च का मौसम सबसे सही लगा। मौसम ठंडा रहता है, इसलिए मंदिरों और गलियों में घूमते हुए थकान भी कम होती है। अगर होली या जन्माष्टमी के समय जाएँ, तो यहाँ का माहौल बिल्कुल अलग नजर आता है हर तरफ रंग, भजन और श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिलती है। बस इन दिनों भीड़ बहुत ज्यादा होती है, इसलिए दर्शन और घूमने में सामान्य दिनों से ज्यादा समय लग सकता है।
11. अलवर - सरिस्का – Alwar - Sariska
अलवर-सरिस्का पहुँचकर हमें लगा कि यह जगह बाकी पर्यटन स्थलों से बिल्कुल अलग है। सुबह सरिस्का की सफारी पर निकलना इस यात्रा का सबसे अच्छा हिस्सा रहा। जंगल के शांत रास्तों से गुजरते हुए अचानक हिरणों का झुंड दिखाई दिया, तो कुछ देर के लिए बस उन्हें देखते रहने का मन किया। इसके बाद बाला किला और सिलिसेढ़ झील घूमने गए, जहाँ बैठकर आसपास का शांत माहौल अच्छा लगा। इस जगह की खास बात यही लगी कि एक ही यात्रा में जंगल, वन्यजीव और ऐतिहासिक जगहें देखने को मिल जाती हैं। अगर दिल्ली की भागदौड़ से एक छोटा ब्रेक लेकर कहीं शांत और अलग जगह घूमना चाहते हैं, तो अलवर-सरिस्का अच्छा विकल्प है।
दिल्ली से अलवर-सरिस्का की दूरी
दिल्ली से अलवर करीब 165 किलोमीटर है। कार से हमें लगभग 3 घंटे लगे। सरिस्का पहुँचने में अलवर से करीब 40 किलोमीटर और जोड़ सकते हैं।
कैसे जाएँ - How to Reach
हमारे अनुभव में कार से जाना सबसे आसान रहा। ट्रेन से अलवर तक जाकर वहाँ से cab लेकर सरिस्का भी जा सकते हैं।
किस Season में जाएँ - Best Time to Visit
अक्टूबर से मार्च घूमने और सफारी के लिए अच्छा समय है। हमें सुबह की सफारी इस मौसम में ज्यादा आरामदायक लगी। गर्मियों में जंगल में वन्यजीव दिखने की संभावना अच्छी हो सकती है, लेकिन गर्मी काफी तेज रहती है।
घूमने की प्रमुख जगहें - Best Places to Visit
अलवर-सरिस्का की यात्रा में हमने सबसे पहले सरिस्का टाइगर रिजर्व की सफारी की, जो पूरे ट्रिप का सबसे रोमांचक हिस्सा रहा। इसके बाद बाला किला से अलवर शहर का नजारा देखा और सिलिसेढ़ झील के किनारे कुछ समय शांति से बिताया। समय मिले तो अलवर सिटी पैलेस और पांडुपोल हनुमान मंदिर भी घूम सकते हैं। हमें खास तौर पर अच्छा लगा कि यहाँ जंगल और wildlife के साथ ऐतिहासिक जगहें भी एक ही यात्रा में देखने को मिल जाती हैं।
12. चंडीगढ़ - मोरनी हिल्स – Chandigarh – Morni Hills
चंडीगढ़ से मोरनी हिल्स की तरफ निकलते ही रास्ते का माहौल बदलने लगता है। शहर पीछे छूटता जाता है और चारों तरफ हरियाली व पहाड़ दिखाई देने लगते हैं। हमें यहाँ की ठंडी हवा और शांत माहौल सबसे ज्यादा अच्छा लगा। मोरनी झील के पास कुछ देर बैठकर आसपास की पहाड़ियों को देखते रहे तो लगा कि इतनी दूर आए बिना भी थोड़ी देर के लिए शहर से पूरी तरह दूर हो गए हैं। अगर आपका मन वीकेंड पर बस शांत जगह में घूमने और थोड़ा सुकून पाने का है, तो मोरनी हिल्स एक अच्छी छोटी यात्रा हो सकती है।
दिल्ली से मोरनी हिल्स की दूरी
दिल्ली से मोरनी हिल्स की दूरी करीब 260–280 किलोमीटर है। हम कार से गए थे और रास्ते में एक-दो जगह रुकने के साथ करीब 5–6 घंटे लग गए। चंडीगढ़ के बाद जैसे-जैसे पहाड़ी रास्ता शुरू होता है, सफर और भी अच्छा लगने लगता है।
मोरनी हिल्स कैसे जाएँ
हमने कार से जाना ज्यादा आसान पाया। अपनी गाड़ी से जाएँ तो रास्ते में मनपसंद जगह रुकने की भी आजादी रहती है। अगर अपनी कार नहीं है, तो cab ले सकते हैं। पहले पंचकूला या चंडीगढ़ तक पहुँचकर वहाँ से भी मोरनी हिल्स के लिए taxi मिल जाती है।
घूमने की प्रमुख जगहें
यहाँ मोरनी झील, टिक्कर ताल, मोरनी किला और Thakurdwara Temple देख सकते हैं। हमें मोरनी झील के आसपास बैठकर पहाड़ियों और हरियाली को देखना सबसे अच्छा लगा। अगर मौसम अच्छा हो, तो यहाँ कुछ समय बस प्रकृति के बीच बैठकर बिताना भी अपने आप में काफी अच्छा अनुभव है।
13. देहरादून – Dehradun
देहरादून हमारे लिए ऐसा शहर रहा जहाँ पहाड़ों की शुरुआत महसूस होती है, लेकिन शहर की सुविधाएँ भी आसानी से मिल जाती हैं। Robber’s Cave में घूमना, Sahastradhara के आसपास समय बिताना और Forest Research Institute की खूबसूरत इमारत देखना हमें काफी अच्छा लगा। शाम को Paltan Bazaar की हलचल और स्थानीय खाने का स्वाद लेना भी ट्रिप का मजेदार हिस्सा रहा। अगर आप दिल्ली से बहुत दूर जाए बिना पहाड़, हरियाली और थोड़ा शांत माहौल एक साथ देखना चाहते हैं, तो देहरादून एक अच्छा वीकेंड option है।
दिल्ली से देहरादून की दूरी
दिल्ली से देहरादून करीब 250 किलोमीटर है। हम कार से गए थे और रास्ते में ट्रैफिक के हिसाब से करीब 6 घंटे लगे। सुबह जल्दी निकलने पर सफर काफी आरामदायक रहा और जैसे-जैसे देहरादून करीब आया, पहाड़ों और हरियाली की झलक देखकर सफर की थकान भी कम लगने लगी।
घूमने की प्रमुख जगहें
Robber’s Cave, Sahastradhara, Forest Research Institute, Tapkeshwar Temple और Paltan Bazaar जरूर देख सकते हैं। हमें Robber’s Cave में पानी के बीच चलते हुए घूमना और FRI की शांत व खूबसूरत campus में समय बिताना सबसे ज्यादा अच्छा लगा।
देहरादून किस समय में जाएँ
हमें मार्च से जून और सितंबर से नवंबर का मौसम घूमने के लिए सबसे अच्छा लगा। बारिश के बाद आसपास की हरियाली बहुत सुंदर दिखती है और मौसम भी सुहावना रहता है। सर्दियों में ठंड जरूर बढ़ जाती है, लेकिन अगर आपको ठंडा मौसम पसंद है तो दिसंबर से फरवरी भी अच्छा समय हो सकता है।
14. कानाताल – Kanatal
कानाताल पहुँचने के बाद हमें सबसे अच्छी चीज यहाँ का शांत माहौल लगा। यहाँ दूसरे बड़े हिल स्टेशन जैसी भीड़ नहीं दिखती, इसलिए आराम से घूमने और पहाड़ों को enjoy करने का पूरा मौका मिलता है। हम देवदार के पेड़ों के बीच घूमे, आसपास के पहाड़ों के views देखे और शाम को ठंडी हवा में काफी देर बैठे रहे। सच कहूँ तो यहाँ आकर ऐसा लगा कि कुछ समय के लिए रोज की भागदौड़ से दूर हो गए हैं। अगर आपको भीड़-भाड़ से दूर पहाड़ों में शांति से समय बिताना पसंद है, तो कानाताल आपको जरूर पसंद आएगा।
दिल्ली से कानाताल की दूरी
दिल्ली से कानाताल करीब 300–320 किलोमीटर दूर है। हम कार से गए थे और रास्ते में चाय-नाश्ते के लिए रुकते हुए करीब 8–9 घंटे लग गए। जैसे-जैसे पहाड़ी रास्ता शुरू होता है, सफर थोड़ा लंबा जरूर लगता है, लेकिन रास्ते में मिलने वाले पहाड़ों और हरियाली की वजह से बोरियत नहीं होती।
कानाताल कैसे जाएँ - How to Reach
हमारे लिए कार से जाना सबसे आसान रहा, क्योंकि रास्ते में जहाँ मन किया वहाँ रुक पाए। अपनी कार न हो तो cab भी अच्छा विकल्प है। ट्रेन से जाना चाहें तो देहरादून या ऋषिकेश तक ट्रेन लेकर आगे cab कर सकते हैं। अपनी गाड़ी से जाने का एक फायदा यह भी है कि कानाताल पहुँचने के बाद आसपास की जगहों पर जाने में ज्यादा परेशानी नहीं होती। शांत पहाड़ी वातावरण और कम भीड़ वाली जगह पसंद है, तो कनाताल में घूमने की सबसे खूबसूरत जगहें आपके लिए अच्छा विकल्प हो सकती हैं।
घूमने की प्रमुख जगहें - Best Places to Visit Kanatal
कानाताल घूमने आएँ तो Surkanda Devi Temple, Tehri Lake, Kaudia Forest और Dhanaulti को अपनी list में जरूर रखें। हमें खासतौर पर Kaudia Forest का शांत माहौल और चारों तरफ दिखने वाले पहाड़ काफी अच्छे लगे। अगर थोड़ा Adventure पसंद है तो यहाँ nature walks और जंगल के आसपास घूमने का अनुभव भी अच्छा रहता है। Tehri Lake की तरफ जाते हुए रास्ते के views भी काफी खूबसूरत मिलते हैं। इन जगहों को साथ में देखने पर कानाताल का Trip सिर्फ एक जगह घूमने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आसपास की पहाड़ी खूबसूरती को भी अच्छी तरह enjoy करने का मौका मिलता है।
15. खाटू श्याम जी – Khatu Shyam Ji
खाटू श्याम जी की यात्रा हमारे लिए सिर्फ एक घूमने का सफर नहीं रही। जैसे-जैसे मंदिर की तरफ बढ़ते हैं, रास्ते में सुनाई देते “श्याम बाबा की जय” के जयकारे और श्रद्धालुओं की भीड़ माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बना देती है। मंदिर में दर्शन के लिए लाइन में कुछ समय इंतजार जरूर करना पड़ा, लेकिन जब बाबा के सामने पहुँचकर दर्शन हुए तो उस पल की खुशी अलग ही थी। बाहर निकलते समय मन काफी हल्का और शांत महसूस हुआ। आसपास की गलियों में प्रसाद की दुकानें और भक्तों की चहल-पहल भी इस यात्रा का हिस्सा लगती है। अगर आप खाटू श्याम जी जा रहे हैं, तो सिर्फ जल्दी दर्शन करके लौटने के बजाय थोड़ा समय यहाँ के माहौल को महसूस करने के लिए जरूर रखें।
दिल्ली से खाटू श्याम जी की दूरी
दिल्ली से खाटू श्याम जी की दूरी करीब 270–280 किलोमीटर है। हम सुबह जल्दी कार से निकले थे और रास्ते में ट्रैफिक के हिसाब से लगभग 6 घंटे लगे। अपने वाहन से जाने में हमें इसलिए आसानी लगी क्योंकि रास्ते में जब मन हुआ, तब चाय या खाने के लिए रुक गए। अगर ट्रेन से जाना चाहें तो Ringas Junction तक ट्रेन ले सकते हैं। वहाँ से खाटू के लिए टैक्सी और ऑटो आसानी से मिल जाते हैं। पहली बार जाने वालों के लिए सड़क का रास्ता काफी सीधा और सुविधाजनक लगता है।
घूमने की प्रमुख जगहें
खाटू श्याम मंदिर, श्याम कुंड, श्याम बगीची और गौरीशंकर मंदिर देख सकते हैं।अक्टूबर से मार्च का मौसम घूमने के लिए अच्छा रहता है। फाल्गुन मेले के दौरान माहौल देखने लायक होता है, लेकिन भीड़ बहुत ज्यादा रहती है।
16. नाहन – Nahan
नाहन हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में बसा एक छोटा-सा पहाड़ी शहर है। नाहन पहुँचते ही सबसे अच्छा यहाँ की शांति लगी। न ट्रैफिक का ज्यादा शोर, न पर्यटन स्थल जैसी भागदौड़ बस ठंडी हवा और आसपास की हरी पहाड़ियाँ। खासकर झील के आसपास कुछ देर बैठना काफी सुकून देने वाला रहा। अगर आपका मन भीड़भाड़ से दूर जाकर दो दिन आराम करने का है, तो नाहन एक ऐसी जगह है जहाँ आप सच में थोड़ा धीमा हो सकते हैं।
दिल्ली से नाहन की दूरी और कैसे जाएँ
दिल्ली से नाहन करीब 250–270 किलोमीटर दूर है। हम कार से गए थे और रास्ते में ट्रैफिक के हिसाब से करीब 5–6 घंटे लगे। सुबह जल्दी निकलें तो सफर आरामदायक रहता है और पहाड़ों के रास्ते शुरू होने के बाद सफर का मजा भी बढ़ जाता है। परिवार या दोस्तों के साथ जा रहे हैं तो कार या टैक्सी से जाना सबसे आसान रहेगा। ट्रेन से जाना हो तो अंबाला या कालका तक ट्रेन लेकर आगे टैक्सी या बस से नाहन जा सकते हैं।
घूमने की प्रमुख जगहें और सही मौसम
नाहन में हमें रेणुका झील के आसपास घूमना सबसे अच्छा लगा। इसके अलावा रेणुका जी मंदिर, सुकेती फॉसिल पार्क, त्रिलोकपुर मंदिर और नाहन बाजार भी देख सकते हैं। घूमने के लिए मार्च से जून और सितंबर से नवंबर का मौसम काफी अच्छा रहता है। अगर आपको ठंड और शांत माहौल पसंद है, तो सर्दियों में भी नाहन का अपना अलग मजा है।
17. कुरुक्षेत्र – Kurukshetra
कुरुक्षेत्र पहुँचते ही एक अलग ही सुकून सा महसूस होता है। ब्रह्म सरोवर के किनारे बैठकर थोड़ी देर पानी को देखते रहो, तो मन अपने आप शांत होने लगता है। शाम के समय यहाँ का माहौल और भी अच्छा लगता है। ज्योतिसर पहुँचकर जब श्रीकृष्ण और महाभारत से जुड़ी बातें सुनते हैं, तो मन में यही ख्याल आता है कि इसी धरती पर कभी इतना बड़ा इतिहास रचा गया था। यहाँ घूमने के लिए बहुत ज्यादा चकाचौंध नहीं है, लेकिन अपनापन और शांति खूब मिलती है। अगर दिल से घूमना पसंद है, तो कुरुक्षेत्र एक बार जरूर जाना चाहिए।
दिल्ली से कुरुक्षेत्र की दूरी
दिल्ली से कुरुक्षेत्र की दूरी करीब 160–170 किलोमीटर है। हम कार से गए थे और ट्रैफिक के हिसाब से लगभग 4 घंटे में पहुँच गए। रास्ता भी काफी सीधा है, इसलिए परिवार के साथ एक दिन की छोटी ट्रिप के लिए सफर ज्यादा थकाने वाला नहीं लगता।
घूमने की प्रमुख जगहें - Best Places to Visit
कुरुक्षेत्र में हमने ब्रह्म सरोवर और ज्योतिसर को सबसे पहले रखा। ब्रह्म सरोवर के किनारे बैठकर थोड़ा समय बिताना और फिर ज्योतिसर जाना अच्छा लगा। इसके अलावा श्रीकृष्ण संग्रहालय, भद्रकाली मंदिर और पैनोरमा एवं विज्ञान केंद्र भी घूमने लायक हैं। अगर आपके पास पूरा दिन है, तो इन जगहों को आराम से कवर किया जा सकता है।
18. धनौल्टी – Dhanaulti
20. नीमराना – Neemrana
दिल्ली से कुछ घंटों की drive के बाद राजस्थान के अलवर जिले में स्थित नीमराना पहुँचे तो सबसे पहले यहाँ का पुराना किला और आसपास का शांत माहौल ध्यान खींचता है। Neemrana Fort Palace में घूमते हुए इसकी पुरानी दीवारें, पत्थर की सीढ़ियाँ और खुले आंगन देखकर सच में लगा कि हम किसी पुराने दौर में आ गए हैं। हमें खासतौर पर शाम का समय अच्छा लगा, जब किले की बालकनी से आसपास का नजारा देखते हुए कुछ देर आराम से बैठने का मौका मिला। नीमराना बहुत बड़ा पर्यटन स्थल नहीं है, लेकिन अगर आप दिल्ली से एक छोटा ऐतिहासिक जगहों की सैर चाहते हैं, तो यहाँ बिताया हुआ एक दिन काफी यादगार हो सकता है।
दिल्ली से नीमराना की दूरी और कैसे जाएँ
दिल्ली से नीमराना करीब 120–125 किलोमीटर दूर है। हम कार से गए थे और ट्रैफिक के हिसाब से लगभग 3.0–3.5 घंटे में पहुँच गए। दिल्ली से NH-48 का रास्ता सीधा और आसान है, इसलिए ज्यादा परेशानी नहीं हुई। अगर परिवार या दोस्तों के साथ जा रहे हैं तो कार से जाना हमें ज्यादा अच्छा लगा, क्योंकि रास्ते में अपनी सुविधा के हिसाब से रुक सकते हैं। बस से भी नीमराना पहुँचा जा सकता है।
घूमने की प्रमुख जगहें
Neemrana Fort Palace यहाँ की सबसे खास जगह है। इसके अलावा Baori (सीढ़ीदार कुआँ), Sariska क्षेत्र और आसपास के पुराने heritage spots भी समय मिले तो देख सकते हैं।
अगर आप सर्दियों में घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो सर्दियों में भारत में घूमने की खूबसूरत जगहें भी जरूर देखें। यहाँ आपको मौसम के हिसाब से कई शानदार पर्यटन स्थल के बारे में जानकारी मिल जाएगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
निष्कर्ष - Conclusion
दिल्ली की भागदौड़ भरी जिंदगी से थोड़ा सा ब्रेक लेने के लिए हमेशा लंबी छुट्टी की जरूरत नहीं होती। कई बार एक खाली Weekend ही काफी होता है, बस मन होना चाहिए कहीं निकलने का। अच्छी बात यह है कि दिल्ली के आसपास ऐसी बहुत सी जगहें हैं जहाँ परिवार, दोस्तों या Partner के साथ कुछ अच्छा समय बिताया जा सकता है।
अगर आपके पास सिर्फ एक दिन है, तो नीमराना, मथुरा-वृंदावन या दमदमा लेक जैसी जगहों का छोटा सा Trip अच्छा रहेगा। वहीं 2–3 दिन मिल जाएँ तो आगरा, जयपुर, ऋषिकेश या मसूरी जाकर आराम से घूम सकते हैं।
घूमने का असली मजा सिर्फ ज्यादा से ज्यादा जगहें देखने में नहीं है। कभी रास्ते में रुककर चाय पी लेना, किसी शांत जगह पर कुछ देर बैठना या दोस्तों के साथ बिना किसी जल्दी के बातें करना भी Trip की सबसे अच्छी याद बन जाता है। इसलिए अपनी पसंद और बजट के हिसाब से कोई एक जगह चुनिए और बस निकल पड़िए। हो सकता है यह छोटा सा सफर आपकी रोज की Routine से एक खूबसूरत Break बन जाए।




















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