Haridwar Tourist Places In Hindi-हरिद्वार घूमने की जगह और दर्शनीय स्थल की जानकारी
हरिद्वार में घूमने की 10 सबसे खूबसूरत जगहें | Haridwar Tourist Places in Hindi (2026)
भारत के उत्तराखंड राज्य में स्थित हरिद्वार हिंदुओं के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है। 'हरिद्वार' का अर्थ होता है 'हरि (भगवान) का द्वार', यानी वह स्थान जहाँ से भगवान तक पहुँचने का मार्ग माना जाता है। यही वह पवित्र नगरी है जहाँ माँ गंगा पहली बार हिमालय की पहाड़ियों से निकलकर उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों में प्रवेश करती हैं।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान अमृत कलश से अमृत की कुछ बूंदें चार स्थानों हरिद्वार, प्रयागराज, उज्जैन और नासिक पर गिरी थीं। इसी कारण इन चारों तीर्थों में हर 12 वर्ष के अंतराल पर विश्व प्रसिद्ध कुंभ मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें करोड़ों श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाने पहुँचते हैं।
धार्मिक महत्व के साथ-साथ हरिद्वार भारत के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में भी शामिल है। यहाँ हर साल देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु और पर्यटक गंगा आरती, मंदिरों, आश्रमों और प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव करने आते हैं। इतना ही नहीं, हरिद्वार को दुनिया के सबसे प्राचीन शहरों में भी गिना जाता है, जिसका इतिहास हजारों वर्षों पुराना माना जाता है।
अक्सर लोग हरिद्वार को केवल गंगा स्नान और हर की पौड़ी तक ही सीमित समझते हैं, लेकिन इस पवित्र शहर में कई ऐसे प्राचीन मंदिर, आश्रम और दर्शनीय स्थल मौजूद हैं जो इसकी सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को और भी खास बनाते हैं। इस लेख में हम आपको हरिद्वार की 10 सबसे प्रमुख घूमने की जगहों के बारे में विस्तार से बताएंगे, ताकि आपकी यात्रा और भी यादगार बन सके।
अगर आप मानसून में हरियाली, झरनों और ठंडे मौसम का आनंद लेना चाहते हैं, तो अगस्त में घूमने की 15 सबसे खूबसूरत जगहें पर हमारा लेख भी आपके लिए एक बेहतरीन गाइड साबित हो सकता है।
1. हर की पौड़ी – हरिद्वार का सबसे प्रसिद्ध और पवित्र घाट
हरिद्वार का नाम आते ही सबसे पहले जिस जगह की तस्वीर मन में उभरती है, वह है हर की पौड़ी। यह सिर्फ एक घाट नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है। यह पवित्र घाट हरिद्वार बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहाँ हर दिन हजारों श्रद्धालु और पर्यटक माँ गंगा में स्नान करने और आध्यात्मिक शांति का अनुभव करने पहुँचते हैं।
धार्मिक मान्यता है कि हर की पौड़ी में गंगा स्नान करने से व्यक्ति के पापों का नाश होता है और उसे आध्यात्मिक शांति की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्री हरि विष्णु ने इस स्थान पर अपने चरण रखे थे। इसी कारण इस घाट का नाम हर की पौड़ी, अर्थात भगवान हरि की सीढ़ी, पड़ा।
इतिहास के अनुसार, पहली शताब्दी में राजा विक्रमादित्य ने अपने बड़े भाई भर्तृहरि की स्मृति में इस घाट का निर्माण करवाया था। माना जाता है कि भर्तृहरि लंबे समय तक गंगा किनारे तपस्या करते रहे। आज भी यहाँ उनकी गुफा दर्शनीय स्थलों में शामिल है, जहाँ श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुँचते हैं।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के समय अमृत कलश की एक बूंद हरिद्वार में भी गिरी थी। यही कारण है कि हर की पौड़ी को हिंदू धर्म के सबसे पवित्र घाटों में गिना जाता है और कुंभ मेले के दौरान यहाँ करोड़ों श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाने आते हैं।
शाम के समय होने वाली गंगा आरती हर की पौड़ी का सबसे मनमोहक आकर्षण है। सैकड़ों दीपों की रोशनी, मंदिरों की घंटियाँ, वैदिक मंत्रों की गूंज और माँ गंगा की लहरें ऐसा आध्यात्मिक वातावरण बनाती हैं, जिसे देखने के बाद हर यात्री इस पल को लंबे समय तक याद रखता है। अगर आप हरिद्वार पहली बार जा रहे हैं, तो सुबह का गंगा स्नान और शाम की भव्य गंगा आरती बिल्कुल भी मिस न करें। यकीन मानिए, यह अनुभव आपकी पूरी यात्रा की सबसे खूबसूरत याद बन सकता है।
2. माता मंशा देवी मंदिर-Mansha Devi Temple
हरिद्वार आने वाले अधिकांश श्रद्धालु अपनी यात्रा की शुरुआत माता मनसा देवी के दर्शन से करते हैं। बिल्व पर्वत पर स्थित यह मंदिर आस्था, प्राकृतिक सुंदरता और मनमोहक दृश्यों के लिए प्रसिद्ध है। यह मंदिर माता शक्ति से जुड़े प्रमुख सिद्धपीठों में से एक माना जाता है और श्रद्धालुओं के बीच इसकी विशेष धार्मिक मान्यता है। हरिद्वार रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड से इसकी दूरी लगभग 2-3 किलोमीटर है।
मंदिर तक पहुँचने के लिए श्रद्धालुओं के पास तीन विकल्प हैं। आप पैदल सीढ़ियों से चढ़ाई कर सकते हैं, सड़क मार्ग से वाहन द्वारा पहुँच सकते हैं या फिर रोपवे (उड़न खटोला) का आनंद लेते हुए कुछ ही मिनटों में मंदिर तक पहुँच सकते हैं। रोपवे की सवारी के दौरान पूरे शहर, माँ गंगा और आसपास की पहाड़ियों का खूबसूरत नज़ारा देखने को मिलता है, जो इस यात्रा को और भी यादगार बना देता है।
मंदिर में हर साल देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए आते हैं। सुबह 5 बजे से रात 9 बजे तक मंदिर भक्तों के लिए खुला रहता है। गर्भगृह में माता की दो दिव्य प्रतिमाएँ स्थापित हैं। एक प्रतिमा में माता पाँच मुख और पाँच भुजाओं के स्वरूप में विराजमान हैं, जबकि दूसरी प्रतिमा में उन्हें आठ भुजाओं वाले रूप में पूजा जाता है।
इस मंदिर की सबसे खास परंपरा मनोकामना का धागा बाँधना है। श्रद्धालु मंदिर परिसर में स्थित पवित्र वृक्ष पर अपनी मनोकामना के साथ धागा बाँधते हैं। ऐसी मान्यता है कि माता मनसा देवी सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य सुनती हैं। अगर आप हरिद्वार घूमने की योजना बना रहे हैं, तो सुबह के समय या शाम की आरती से पहले यहाँ पहुँचना बेहतर रहेगा। इस समय भीड़ अपेक्षाकृत कम होती है और दर्शन भी आसानी से हो जाते हैं।
हरिद्वार के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में चंडी देवी मंदिर का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। नील पर्वत की पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। सालभर देश-विदेश से हजारों भक्त माता के दर्शन और आशीर्वाद के लिए यहाँ पहुँचते हैं। ऐसी मान्यता है कि माता चंडी सच्चे मन से की गई हर प्रार्थना सुनती हैं, इसलिए श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएँ लेकर यहाँ आते हैं।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, प्राचीन समय में शुंभ और निशुंभ नाम के दो शक्तिशाली राक्षसों ने देवताओं को पराजित कर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया था। तब देवताओं की प्रार्थना पर माता पार्वती ने माता चंडी (चंडिका) का उग्र रूप धारण कर दोनों राक्षसों का वध किया और धर्म की रक्षा की। मान्यता है कि युद्ध के बाद माता ने कुछ समय नील पर्वत पर विश्राम किया था। बाद में इसी पवित्र स्थान पर चंडी देवी मंदिर की स्थापना की गई।
मंदिर तक पहुँचने के लिए श्रद्धालु पैदल चढ़ाई कर सकते हैं या रोपवे की सुविधा का लाभ ले सकते हैं। रोपवे से यात्रा करते समय हरिद्वार शहर, माँ गंगा और आसपास की पहाड़ियों का मनमोहक दृश्य दिखाई देता है, जो इस यात्रा को और भी यादगार बना देता है। अगर आप हरिद्वार घूमने की योजना बना रहे हैं, तो चंडी देवी मंदिर के दर्शन जरूर करें।
4. दक्ष महादेव-Daksh Mahadev
हरिद्वार के हर की पौड़ी से लगभग 4 किलोमीटर की दूरी पर कणखल क्षेत्र में स्थित दक्ष महादेव मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। यह मंदिर अपनी पौराणिक मान्यताओं और ऐतिहासिक महत्व के कारण श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का केंद्र माना जाता है।
पौराणिक कथा के अनुसार, प्रजापति दक्ष ने यहीं एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया था, जिसमें सभी देवी-देवताओं को आमंत्रित किया गया, लेकिन भगवान शिव को नहीं बुलाया गया। यह अपमान माता सती सहन नहीं कर सकीं और उन्होंने उसी यज्ञ कुंड की अग्नि में अपने प्राण त्याग दिए। इसके बाद भगवान शिव के क्रोध से उत्पन्न वीरभद्र ने प्रजापति दक्ष का सिर काट दिया। बाद में भगवान शिव ने उन्हें क्षमा करते हुए बकरे का सिर लगाकर पुनर्जीवित किया। तभी से यह स्थान दक्ष महादेव मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है।
मान्यता है कि जिस यज्ञ कुंड में माता सती ने आत्मबलिदान दिया था, उसकी पवित्र अग्नि का प्रतीक आज भी मंदिर परिसर में सुरक्षित रखा गया है। मंदिर के गर्भगृह में भगवान शिव शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं। यहाँ भगवान विष्णु के चरणचिह्न भी दर्शनीय हैं, जिनके दर्शन के लिए हर साल हजारों श्रद्धालु आते हैं।
अगर आप हरिद्वार की धार्मिक और पौराणिक विरासत को करीब से जानना चाहते हैं, तो दक्ष महादेव मंदिर को अपनी यात्रा सूची में जरूर शामिल करें।
5. पावन धाम-Pawan Dham Temple
पावन धाम मंदिर हरिद्वार के सबसे लोकप्रिय दर्शनीय स्थलों में से एक है। इस मंदिर का निर्माण स्वामी वेदांत महाराज ने वर्ष 1970 में करवाया था। अपनी अनूठी वास्तुकला और काँच से बनी सुंदर कलाकृतियों के कारण यह मंदिर देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों का विशेष आकर्षण बना रहता है।
मंदिर के भीतर भगवान और देवी-देवताओं की आकर्षक काँच की मूर्तियाँ तथा रंग-बिरंगी सजावट देखने को मिलती है। सूरज की रोशनी पड़ने पर ये कलाकृतियाँ और भी मनमोहक दिखाई देती हैं, जिससे मंदिर का वातावरण बेहद शांत और दिव्य महसूस होता है। अगर आप हरिद्वार में धार्मिक स्थलों के साथ-साथ अनोखी कला का भी आनंद लेना चाहते हैं, तो पावन धाम मंदिर को अपनी यात्रा सूची में जरूर शामिल करें।
अगर आप हरिद्वार की भीड़-भाड़ से दूर उत्तराखंड की शांत और प्राकृतिक खूबसूरती का अनुभव करना चाहते हैं, तो उत्तराखंड के 15 ऑफबीट पर्यटन स्थल जरूर देखें। यहाँ आपको ऐसी अनोखी जगहों के बारे में जानकारी मिलेगी, जहाँ प्रकृति और सुकून दोनों आपका इंतजार कर रहे हैं।
6. भारत माता मंदिर-Bharat Mata Temple
हरिद्वार के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में भारत माता मंदिर का विशेष स्थान है। लगभग 180 फीट ऊँचा यह आठ मंजिला मंदिर अपनी अनोखी बनावट और देशभक्ति की भावना के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर की प्रत्येक मंजिल भारत की संस्कृति, देवी-देवताओं, महान संतों और देश की आज़ादी में योगदान देने वाले वीर सपूतों को समर्पित है।
मंदिर की पहली मंजिल पर भारत माता की भव्य प्रतिमा स्थापित है, जो श्रद्धालुओं और पर्यटकों का सबसे पहले ध्यान आकर्षित करती है। ऊपर की मंजिलों पर विभिन्न देवी-देवताओं, संत-महात्माओं और महान विभूतियों की सुंदर प्रतिमाएँ एवं चित्र देखने को मिलते हैं।
यह मंदिर सप्त ऋषि आश्रम के पास स्थित है। यहाँ ऊपर तक पहुँचने के लिए सीढ़ियों के साथ-साथ लिफ्ट की सुविधा भी उपलब्ध है। सबसे ऊपरी मंजिल से हरिद्वार शहर, माँ गंगा और दूर दिखाई देने वाली हिमालय की पर्वत श्रृंखलाओं का मनमोहक दृश्य देखने को मिलता है। अगर आप हरिद्वार की धार्मिक यात्रा के साथ भारत की संस्कृति और इतिहास को भी करीब से देखना चाहते हैं, तो भारत माता मंदिर जरूर जाएँ।
हरिद्वार से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सप्त ऋषि आश्रम शहर के सबसे शांत और पवित्र धार्मिक स्थलों में से एक है। अगर आप भीड़-भाड़ से दूर कुछ समय आध्यात्मिक शांति और प्राकृतिक सुंदरता के बीच बिताना चाहते हैं, तो यह जगह आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यही वह स्थान है जहाँ हिंदू धर्म के सात महान ऋषि—कश्यप, अत्रि, वशिष्ठ, जमदग्नि, गौतम, विश्वामित्र और भारद्वाज ने कठोर तपस्या की थी। कहा जाता है कि जब माँ गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुईं, तब इन ऋषियों की तपस्या में कोई बाधा न आए, इसलिए गंगा ने स्वयं को सात धाराओं में विभाजित कर लिया।
आगे चलकर ये सातों धाराएँ फिर एक साथ मिलती हैं, जिन्हें नील धारा के नाम से जाना जाता है। आश्रम का शांत वातावरण, माँ गंगा का पावन तट और धार्मिक महत्व इसे हरिद्वार के सबसे खास दर्शनीय स्थलों में शामिल करते हैं। अगर आप हरिद्वार की यात्रा के दौरान कुछ सुकून भरे पल बिताना चाहते हैं, तो सप्त ऋषि आश्रम जरूर जाएँ।
8. भीम गौड़ा कुंड-Bhimgoda
हर की पौड़ी के पास स्थित भीम गौड़ा कुंड हरिद्वार की उन जगहों में शामिल है, जहाँ धार्मिक आस्था के साथ-साथ महाभारत से जुड़ी पौराणिक मान्यताएँ भी देखने को मिलती हैं।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, महाभारत युद्ध के बाद जब पांडव और द्रौपदी स्वर्ग की ओर प्रस्थान कर रहे थे, तब रास्ते में द्रौपदी को प्यास लगी। कहा जाता है कि भीम ने अपनी एड़ी (गौड़ा) से भूमि पर प्रहार किया, जिससे यहाँ जलधारा फूट पड़ी। इसी स्थान पर आज भीम गौड़ा कुंड स्थित है।
कुंड के पास एक प्राचीन मंदिर भी है, जहाँ श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए आते हैं। शांत वातावरण और धार्मिक महत्व के कारण यह स्थान हरिद्वार आने वाले यात्रियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहता है। अगर आप हर की पौड़ी घूमने आए हैं, तो कुछ समय निकालकर भीम गौड़ा कुंड भी जरूर जाएँ। यहाँ का शांत वातावरण और पौराणिक महत्व आपकी यात्रा को और भी यादगार बना देगा।
9. चीला वन्य जीव अभ्यारण-Chilla Wildlife Sanctuary
हरिद्वार से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित चीला वन्यजीव अभयारण्य प्रकृति और वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक बेहतरीन पर्यटन स्थल है। अगर आप हरिद्वार के मंदिरों और घाटों के साथ कुछ समय हरियाली और जंगलों के बीच बिताना चाहते हैं, तो यह जगह जरूर घूमनी चाहिए।
यह अभयारण्य राजाजी टाइगर रिजर्व का हिस्सा है और अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए जाना जाता है। यहाँ हाथी, बाघ, तेंदुआ, भालू, हिरण, जंगली सूअर और कई तरह के पक्षियों सहित अनेक वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में देखा जा सकता है। खास तौर पर यह क्षेत्र जंगली हाथियों की मौजूदगी के लिए काफी प्रसिद्ध है।
अगर आप भाग्यशाली रहे, तो जंगल सफारी के दौरान कई दुर्लभ वन्यजीवों के दर्शन भी हो सकते हैं। शांत वातावरण, घने जंगल और प्राकृतिक सुंदरता इस जगह को हरिद्वार की भीड़-भाड़ से दूर कुछ सुकून भरे पल बिताने के लिए एक शानदार विकल्प बनाते हैं।
10. क्रिस्टल वर्ल्ड-Crystal World
अगर आप हरिद्वार की धार्मिक यात्रा के साथ कुछ मनोरंजन भी करना चाहते हैं, तो क्रिस्टल वर्ल्ड एक अच्छा विकल्प हो सकता है। यह वाटर पार्क हरिद्वार–दिल्ली रोड पर, हरिद्वार से लगभग 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और परिवार व बच्चों के बीच काफी लोकप्रिय है।
यहाँ कई तरह की वॉटर राइड्स, स्विमिंग पूल और मनोरंजन की सुविधाएँ उपलब्ध हैं, जहाँ आप परिवार या दोस्तों के साथ पूरा दिन आराम से बिता सकते हैं। हरिद्वार से लौटते समय या यात्रा की शुरुआत में यहाँ कुछ घंटे बिताकर सफर की थकान भी कम की जा सकती है।
पर्यटकों की सुविधा के लिए यहाँ ठहरने की व्यवस्था और भोजन के लिए रेस्टोरेंट भी उपलब्ध हैं। यदि आप टिकट, समय या अन्य जानकारी पहले से जानना चाहते हैं, तो यात्रा से पहले क्रिस्टल वर्ल्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर नवीनतम जानकारी देख लेना बेहतर रहेगा।
हरिद्वार उत्तराखंड का प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थल है, इसलिए यहाँ पहुँचना काफी आसान है। चाहे आप हवाई यात्रा करना पसंद करते हों, ट्रेन से सफर करना चाहते हों या सड़क मार्ग से आना चाहें, तीनों विकल्प आसानी से उपलब्ध हैं।
बस से कैसे पहुँचे-How to Reach Haridwar by Bus
दिल्ली से हरिद्वार लगभग 230 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है दिल्ली से 6 से 7 घंटे में आप बड़ी आसानी से हरिद्वार पहुँच सकते है यहाँ से आप राज्य परिवहन की बस या वॉल्वो बस ले सकते है इसके अलावा उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, आदि से हरिद्वार की सीधी बसे मिल जाती है
रेल से कैसे पहुँचे-How to Reach Haridwar by Train
हरिद्वार रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड बिल्कुल आमने- सामने है दिल्ली से हरिद्वार के लिए अनेकों ट्रेन चलती है इसके अलावा भारत के अनेकों राज्यो से भी हरिद्वार के लिए सीधी ट्रेन मिल जाती है
हवाई जहाज से कैसे पहुँचे-How to Reach Haridwar by Flights
हरिद्वार के सबसे नजदीकी हवाई अड्डा जॉली ग्रांट हवाई अड्डा देहरादून है जो हरिद्वार से लगभग से लगभग 42 किलोमीटर की दूरी पर है यहाँ से हरिद्वार आप बस या टैक्सी से पहुँच सकते है
हरिद्वार को उत्तराखंड की चारधाम यात्रा का प्रमुख प्रवेश द्वार माना जाता है। अगर आप यहाँ से आगे केदारनाथ धाम जाने की योजना बना रहे हैं, तो हमारी केदारनाथ यात्रा गाइड जरूर पढ़ें। इसमें यात्रा मार्ग, रजिस्ट्रेशन, हेलीकॉप्टर सेवा, ठहरने की व्यवस्था, मौसम और जरूरी ट्रैवल टिप्स की पूरी जानकारी दी गई है।
हरिद्वार घूमने का सबसे अच्छा समय - Best Time to Visit Haridwar
हरिद्वार घूमने के लिए अक्टूबर से मार्च का समय सबसे अच्छा माना जाता है। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है, जिससे हर की पौड़ी, मनसा देवी मंदिर, चंडी देवी मंदिर और अन्य प्रमुख दर्शनीय स्थलों की सैर आराम से की जा सकती है। अगर आप हर की पौड़ी की भव्य गंगा आरती का दिव्य अनुभव लेना चाहते हैं, तो शाम के समय यहाँ जरूर पहुँचें। अप्रैल से जून के बीच गर्मी बढ़ जाती है, लेकिन चारधाम यात्रा सीजन शुरू होने के कारण इस समय भी श्रद्धालुओं और पर्यटकों की अच्छी-खासी भीड़ रहती है। वहीं जुलाई से सितंबर के दौरान मानसून की वजह से हरिद्वार की प्राकृतिक सुंदरता और हरियाली देखने लायक होती है, हालांकि कभी-कभी भारी बारिश यात्रा में बाधा बन सकती है। अगर आप कम भीड़, सुहावने मौसम और आरामदायक यात्रा का आनंद लेना चाहते हैं, तो अक्टूबर, नवंबर, फरवरी और मार्च हरिद्वार घूमने के लिए सबसे बेहतरीन महीने हैं।
हरिद्वार का प्रसिद्ध स्थानीय भोजन - Best Local Food in Haridwar
हरिद्वार की यात्रा सिर्फ मंदिरों और गंगा आरती तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यहाँ का स्वादिष्ट स्थानीय भोजन भी पर्यटकों को खूब पसंद आता है। इस धार्मिक नगरी में आपको ज्यादातर शुद्ध शाकाहारी और पारंपरिक उत्तर भारतीय व्यंजन मिलते हैं। अगर आप हरिद्वार घूमने आए हैं, तो आलू पूरी, कचौड़ी-सब्ज़ी, चना मसाला, दही भल्ले, चाट, समोसा, गरमा-गरम जलेबी, रबड़ी, लस्सी और कुल्हड़ वाली चाय का स्वाद जरूर लें। जैसे मोहन जी पूरी वाले, मथुरा वालों की प्राचीन मिठाई, आदि सर्दियों के मौसम में यहाँ का गाजर का हलवा भी काफी पसंद किया जाता है, जबकि पेड़ा स्थानीय मिठाइयों में अपनी अलग पहचान रखता है। हर की पौड़ी और अपर रोड के आसपास कई पुराने और प्रसिद्ध भोजनालय हैं, जहाँ आपको ताज़ा, स्वादिष्ट और किफायती शुद्ध शाकाहारी भोजन आसानी से मिल जाएगा। अगर आप हरिद्वार की यात्रा को स्वाद के साथ यादगार बनाना चाहते हैं, तो यहाँ के स्थानीय व्यंजनों का आनंद लेना बिल्कुल न भूलें।
हरिद्वार में कहाँ ठहरें - Where to Stay in Haridwar
हरिद्वार में हर बजट के अनुसार ठहरने के लिए कई अच्छे होटल, गेस्ट हाउस और धर्मशालाएँ उपलब्ध हैं। अगर आप हर की पौड़ी, मनसा देवी मंदिर और अन्य प्रमुख दर्शनीय स्थलों के पास रहना चाहते हैं, तो हर की पौड़ी, अपर रोड और रेलवे स्टेशन के आसपास ठहरना सबसे सुविधाजनक रहेगा। कम बजट में यात्रा करने वाले पर्यटकों के लिए जयराम आश्रम, कुम्हार धर्मशाला, पंजाब एवं सिंध क्षेत्र की धर्मशालाएँ सहित कई साफ-सुथरे और किफायती ठहरने के विकल्प उपलब्ध हैं। वहीं बेहतर सुविधाओं की तलाश करने वाले यात्रियों के लिए 3-स्टार और 4-स्टार होटल भी आसानी से मिल जाते हैं। अगर आप परिवार के साथ यात्रा कर रहे हैं, तो होटल पहले से ऑनलाइन बुक कर लेना बेहतर रहेगा, खासकर चारधाम यात्रा, कुंभ मेला, कांवड़ यात्रा और त्योहारों के दौरान, क्योंकि इस समय कमरों की उपलब्धता जल्दी कम हो जाती है। सही स्थान और अपने बजट के अनुसार ठहरने की जगह चुनकर आप हरिद्वार की यात्रा को और भी आरामदायक और यादगार बना सकते हैं।
हरिद्वार यात्रा के लिए जरूरी ट्रैवल टिप्स - Haridwar Travel Tips
अगर आप पहली बार हरिद्वार घूमने जा रहे हैं, तो कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर अपनी यात्रा को और भी आसान, सुरक्षित और यादगार बना सकते हैं।
- गंगा आरती देखने के लिए समय से पहले पहुँचें। हर की पौड़ी पर शाम की गंगा आरती के दौरान काफी भीड़ रहती है, इसलिए अच्छी जगह पाने के लिए कम से कम 30–45 मिनट पहले पहुँचना बेहतर रहेगा।
- मंदिरों में शालीन और आरामदायक कपड़े पहनें। हरिद्वार एक प्रमुख धार्मिक नगरी है, इसलिए मंदिरों और घाटों की मर्यादा का सम्मान करना जरूरी है।
- रोपवे का उपयोग करने की योजना हो, तो टिकट पहले से बुक करें। छुट्टियों, सप्ताहांत और त्योहारों के दौरान मनसा देवी और चंडी देवी मंदिर के रोपवे पर लंबी कतारें लग सकती हैं।
- गंगा में स्नान करते समय सावधानी बरतें। तेज बहाव वाले स्थानों पर जाने से बचें और केवल निर्धारित घाटों पर ही स्नान करें। बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें।
- भीड़भाड़ वाले इलाकों में अपने सामान का ध्यान रखें। हर की पौड़ी और आसपास के बाजारों में मोबाइल, पर्स और अन्य कीमती सामान सुरक्षित रखें।
- आरामदायक जूते पहनें। कई दर्शनीय स्थलों और मंदिरों तक पैदल चलना पड़ सकता है, इसलिए आरामदायक फुटवियर यात्रा को अधिक सुविधाजनक बनाते हैं।
- यात्रा से पहले होटल बुक कर लें। चारधाम यात्रा, कांवड़ यात्रा, कुंभ मेला और प्रमुख त्योहारों के दौरान होटल जल्दी भर जाते हैं, इसलिए एडवांस बुकिंग करना बेहतर रहता है।
- स्थानीय शुद्ध शाकाहारी भोजन का स्वाद जरूर लें। हर की पौड़ी और अपर रोड के आसपास कई पुराने और प्रसिद्ध भोजनालय हैं, जहाँ आप हरिद्वार के पारंपरिक व्यंजनों का आनंद ले सकते हैं।










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