केदारनाथ एक रहस्य -जाने केदारनाथ धाम के बारे में - Kedarnath Temple History In Hindi

Last Update in May 2026

Kedarnath Temple History in Hindi: केदारनाथ धाम का रहस्य और पौराणिक कथा

भारत में अनेको देवी देवताओ की पूजा की जाती है हिन्दू धर्म में पुराणों के अनुसार भगवान शिव ने प्रकर्ति के कल्याण के लिए 12 जगहों पर ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए उन 12 शिवलिंगो को ज्योतिर्लिंगों के रूप में पूजा जाता है जिन में एक ज्योतिर्लिंग केदारनाथ भी है यह चार धाम एवं पंच केदारों में से एक है पंच केदारों में केदारनाथ ,रुदरनाथ ,कल्पेश्वर ,मदवेश्वर और तुंगनाथ शामिल है केदारनाथ भारत के उत्तराखंड राज्य के सोनप्रयाग जिले में हिमालय की केदार घाटी में स्थित है !

Kedarnath Temple in Himalayas showing spiritual pilgrimage and historical significance in Uttarakhand

केदारनाथ मन्दिर के बारे में जाने :-

                             केदारनाथ समुन्दर तल से लगभग 3500 मीटर की ऊंचाई पर है केदारनाथ मन्दिर तीनों तरफ से पहाड़ों से घिरा हुआ है एक तरफ लगभग 22000 फ़ीट ऊंचा केदार पर्वत और दूसरी तरफ 21000 फ़ीट ऊंचा खर्चकुंड और तीसरी तरफ 22000 फ़ीट ऊंचा भरतकुंड न सिर्फ पर्वत बल्कि पांच नदियों का भी संगम यहाँ माना जाता है जिन में मन्दाकनी ,मधुगंगा ,चिरगंगा ,सरस्वती और स्वर्णगौरी शामिल है इन नदियों में कुछ को काल्पनिक माना जाता है क्यों की यहाँ मन्दाकनी ही साफ तौर पर दिखाई देती है !

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Snow covered Kedarnath Temple view with devotees visiting for darshan and religious journey

                केदारनाथ मन्दिर 85 फ़ीट ऊंचा और 187 फ़ीट चौड़ा है और इसकी दीवारें 12 फ़ीट मोटी है यह मन्दिर एक 6 फ़ीट ऊंचे चकोर चूबतरे पर बनाया गया है लेकिन यह भी हैरान कर देने वाली बात है की इतने भारी पत्थर को इतनी ऊंचाई पर कैसे लाया और तराशा गया होगा !माना जाता है की पत्थरों को इंटरलॉकिंग तक्नीक से जोड़ा गया होगा मन्दिर के बाहर नंदी बैल वाहन के रूप में विराजमान है और मन्दिहै र के गरबगरह के चारों तरफ पर्दिक्षणा पथ है| 

केदारनाथ मन्दिर का निर्माण 

                               केदारनाथ मन्दिर के निर्माण को लेकर कई बाते कही जाती है इसको 1000 वर्षो पुराना माना जाता है यह भी माना जाता है कि इस मन्दिर का निर्माण पाण्डवों के वंशज  जन्मजय दवारा करवाया गया था ! और एक मान्यता के अनुसार मन्दिर का निर्माण जगत गुरु आदिशंकराचार्य ने 8वी शताब्दी में करवाया था 32 वर्ष की आयु में सन 820 में केदारनाथ के पास ही उनकी मृत्यु हुई मन्दिर के पिछले भाग में जगत गुरु आदिशंकराचार्य की समाधी भी है !

केदारनाथ मन्दिर को लेकर दो कथाएँ प्रचलित है 

                                 पहली कहानी के अनुसार केदार के शिखर पर भगवान विष्णु के अवतार नर और  नारायण ऋषि यहाँ तपस्या करते थे उनकी तपस्या से खुश होकर भगवान शिव ने उन्हें यहाँ दर्शन दिए और उनकी प्रार्थना के अनुसार ज्योतिर्लिंग के रूप मे यहाँ सदा वास करने का वचन दिया !

 दुसरी कहानी के अनुसार महाभारत युद्ध के बाद पांडवो पर अपने परिवार की हत्या का पाप लगा जिसके लिए पांडव इस पाप से मुक्त होना चाहते थे और शिवजी का आशीर्वाद पाना चाहते थे इसके लिए पांडव काशी गए लेकिन भगवान शिव वहा नहीं मिले पांडव भगवान शिव को ढूंढ़ते-ढूंढ़ते हिमालय तक आ पहुंचे लेकिन भगवान शिव पांडवों को दर्शन नहीं देना चाहते थे इसलिए भगवान शिव वहा से अंतरध्यान हुई और केदारनाथ जा बसे और दूसरी तरफ पांडव भी अपनी लगन के पके थे और वो भी भगवान शिव का पीछा करते - करते केदारनाथ आ पहुचे तभी भगवान शिव ने बैल का रूप धारण किया और पशुओ के झुंड में जा मिले लेकिन पांडवों को इस बात का सन्देह हो गया था तभी भीम ने अपना विशालतम रूप धारण करके दोनों पहाड़ों पर अपने पैर फ़ला दिए यह सब देखकर सभी गाय बैल तो भीम के पैरों के निचे से निकल गए लेकिन भगवान शिव यह करने को तैयार नहीं हुए भीम ने अपने बल से बैल को पकड़ा लेकिन बैल धरती में समाने लगा तब भीम ने बैल की पीठ वाला भाग पकड़ लिया भगवान शंकर पांडवों की भक्ति और इच्छा शक्ति को देख कर बहुत खुश हुए और उन्होंने उसी समय दर्शन देकर पांडवो को पाप से मुक्त कर दिया उसी समय से भगवान शिव बैल की पीठ की आकृति के रूप में केदारनाथ में पूजे जाते है !ऐसा भी माना जाता है कि जब भगवान शिव बैल के रूप में अंतरध्यान हुए तो उनके धड़ के ऊपर का भाग काठमांडू में प्रकट हुआ अब वहाँ पशुपतिनाथ का प्रसिद्ध मन्दिर है शिव की भुजाएं तुम्बिनाथ में मुख रुदरनाथ में नाभि मध्यस्वर और जटा कल्पेश्वर में प्रकट हुई इसलिए इन चार स्थानों की वजह से केदारनाथ को पंच केदारनाथ भी कहा जाता है !

Snow covered Kedarnath Temple view

                           श्री केदारनाथ मन्दिर पर उपस्थित दिव्य पंच कलश भीतर से मोटी ताँबे की धातु और बाहर से सोने की धातु से बनाया गया था जोकि वर्तमान समय में उपस्थित नहीं है क्योंकि कुछ वर्ष पूर्व वह कलश मनुष्य के लालच की भेंट चढ़ गया और वर्तमान में उस कलश के स्थान पर जावलु की श्रेणी का कलश स्थापित है मन्दिर के परागण में द्रोपदी सहित पांच पांडवो की विशाल मूर्तियाँ है और मन्दिर के गर्भग्रह में नुकीली चटान भगवान शिव के सदाशिव रूप में पूजी जाती है !

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केदारनाथ मन्दिर दर्शन करने का सही समय                                                         केदारनाथ मन्दिर के कपाट मेष सक्रांति के 15 दिन पहले खुलते है और अगहन सक्रांति के निकट वलराज की रात को यहाँ पूजा की जाती है भईया दूज के दिन सुबह 4 बजे पूजा करके कपाट बंद कऱ दिए जाते है कपाट बन्द होने के बाद केदारनाथ की पंचमुखी प्रतिमा को ओखी मठ लाया जाता है इस प्रतिमा की पूजा यहाँ रावल जी करते है !

                                 केदारनाथ के पुजारी मैसूर के जंगम ब्रामण ही होते है केदारनाथ जी का मन्दिर आम जन के लिए सुबह 6 बजे खुलता है और दोपहर 3 से 5 यहाँ विशेष पूजा होती है और उसके बाद विश्राम के लिए मन्दिर बन्द कर दिया जाता है और फिर शाम 5 बजे भक्तों के दर्शन के लिए यह मन्दिर खोला जाता है भगवान शिवजी की प्रतिमा का विधिवत श्रींगार करने के बाद 7:30 से 8:30 बजे तक यहां हर रोज आरती की जाती है और रात 8:30 बजे श्रीकेदारनाथ मन्दिर को बन्द कर दिया जाता है |

 कैसे जाएं केदारनाथ                      

  भारत के उत्तराखण्ड राज्य के सोनप्रयाग जिले में स्थित केदारनाथ हिन्दुओं के चार धामों में से एक है  केदारनाथ जाने के लिए आप दिल्ली से ऋषिकेष और फिर ऋषिकेष से श्रीनगर ,देवप्रयाग ,रुद्रप्रयाग होते हुए सोनप्रयाग पहुंचे और सोनप्रयाग में अपनी गाड़ी को पार्क कर दे क्योंकि यहाँ से आगे आप अपनी गाड़ी से नहीं जा सकते सोनप्रयाग से 5 किलोमीटर आगे गौरीकुंड है सोनप्रयाग से गौरीकुंड जाने के लिए आप घोड़ा या टैक्सी से जा सकते है गौरीकुंड में एक गरम पानी का कुण्ड भी है जहाँ आप स्नान भी कर सकते  है और फिर गौरीकुंड से शुरू होती है केदारनाथ की 16 किलोमीटर की पैदल यात्रा आप इस यात्रा में घोड़ा भी कर सकते है क्योंकि यात्रा लम्बी है आप को रास्ते में जगह - जगह पर खाने पिने की दुकानें मिलती है !   

Kedarnath Dham mystery and history with ancient Shiva temple in mountains
Devpryag

 अगर आप हेलिकॉप्टर से यात्रा करना चाहते है तो आप फाटा से केदारनाथ के लिए हेलिकॉप्टर बुक कर सकते है एक बात ध्यान रहे टिकट बुकिंग पहले कर ले वरना आप को टिकट मिलने में परेशानी हो सकती है ऋषिकेष से केदारनाथ के रास्ते में ऋषिकेष से लगभग 196 किलोमीटर की दूरी पर फाटा शहर है जहाँ से आप को हेलिकॉप्टर मिल जाएगा !

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 केदारनाथ धाम से जुड़े सामान्य प्रश्न

1. केदारनाथ मंदिर का इतिहास क्या है?

केदारनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक प्राचीन ज्योतिर्लिंग है, जिसका संबंध महाभारत काल और पांडवों से माना जाता है।

2. केदारनाथ धाम कहाँ स्थित है?

केदारनाथ धाम भारत के उत्तराखंड राज्य के रुद्रप्रयाग जिले में हिमालय की गोद में स्थित है।

3. केदारनाथ यात्रा का सबसे अच्छा समय कब है?

केदारनाथ यात्रा के लिए मई से जून और सितंबर से अक्टूबर का समय सबसे अच्छा माना जाता है।

4. केदारनाथ मंदिर क्यों प्रसिद्ध है?

 यह 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और भगवान शिव के सबसे पवित्र धामों में से माना जाता है।

5. केदारनाथ यात्रा कितनी कठिन है?

यह यात्रा थोड़ी कठिन मानी जाती है क्योंकि इसमें पैदल चढ़ाई शामिल होती है, लेकिन अब हेलीकॉप्टर सेवा भी उपलब्ध है।

6. क्या केदारनाथ में ऑनलाइन बुकिंग होती है?

हाँ, केदारनाथ यात्रा और हेलीकॉप्टर सेवा की बुकिंग ऑनलाइन भी की जा सकती है।

7. केदारनाथ धाम का रहस्य क्या है?

मान्यता है कि मंदिर सदियों तक बर्फ में दबा रहा लेकिन फिर भी इसकी संरचना सुरक्षित रही, जो इसे एक दिव्य रहस्य बनाता है।

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